पात्रलक्षण-परिक्षा (Pātra-Lakṣaṇa Parīkṣā) — Criteria for a Worthy Recipient
यतक्षायं प्रभवति प्रेत्य यत्र च गच्छति । वेदैष मार्ग स्वर्गस्य तथैव नरकस्य च,जिससे समस्त प्रजा उत्पन्न होती है, वह यज्ञ आदि कर्म ब्राह्मणोंसे ही सम्पन्न होता है। जीव जहाँसे उत्पन्न होता है और मृत्युके पश्चात् जहाँ जाता है, उस तत्त्वको, स्वर्ग और नरकके मार्गको तथा भूत, वर्तमान और भविष्यको ब्राह्मण ही जानता है। ब्राह्मण मनुष्योंमें सबसे श्रेष्ठ है। भरतश्रेष्ठ) जो अपने धर्मको जानता है और उसका पालन करता है, वही सच्चा ब्राह्मण है
yat kṣayāyaṁ prabhavati pretya yatra ca gacchati | vedaiṣa mārgaḥ svargasya tathaiva narakasya ca ||
ภีษมะกล่าวว่า “หลักอันใดที่สัตว์เกิดขึ้นจากนั้น และหลังความตายไปสู่ที่ใด พร้อมทั้งหนทางตามพระเวทไปสวรรค์ และทำนองเดียวกันหนทางไปนรก—ทั้งหมดนี้พึงรู้ได้ด้วยพระเวท. ในคำสอนนี้ ภีษมะย้ำว่า ความประเสริฐแท้อยู่ที่การรู้ธรรมและดำเนินชีวิตตามธรรม เพราะความรู้นั้นเป็นเครื่องชี้นำกำเนิด การประพฤติ และปลายทางสุดท้าย.”
भीष्म उवाच