Pūjya-namaskārya-prakaraṇa
On Those Worthy of Honor and Salutation
त्वां तु शोचामि यो लब्ध्वा ब्राह्माण्यं न बुभूषसे । मतंगने कहा--देवराज! मैं तो यों ही दुःखसे आतुर हो रहा हूँ, फिर तुम भी क्यों मुझे पीड़ा दे रहे हो? मुझ मरे हुए को क्यों मारते हो? मैं तो तुम्हारे लिये शोक करता हूँ, जो जन्मसे ही ब्राह्मणत्वको पाकर भी तुम उसे अपना नहीं रहे हो
tvāṃ tu śocāmi yo labdhvā brāhmaṇyaṃ na bubhūṣase |
มตังคะกล่าวว่า “เราร่ำไห้เพื่อท่าน เพราะท่านได้ฐานะพราหมณ์มาแล้ว แต่กลับไม่ปรารถนาจะธำรงไว้. สิ่งที่ควรโอบรับด้วยความประพฤติ ท่านมีมาแต่กำเนิด แต่กลับไม่ยอมทำให้เป็นของตน; ด้วยเหตุนี้เราจึงคร่ำครวญเพื่อท่าน.”
मतंग उवाच