Aṣṭāvakra–Strī-saṃvāda: Dhṛti, hospitality, and a dispute on autonomy
अनृताः स्त्रिय इत्येवं सूत्रकारो व्यवस्यति । यदानृताः स्त्रियस्तात सहधर्म: कुतः स्मृत:,धर्मसूत्रकार यह निश्चितरूपसे कहते हैं कि स्त्रियाँ असत्यपरायण होती हैं। तात! जब स्त्रियाँ असत्यवादिनी ही हैं तब उन्हें साथ रखकर सहधर्मका अनुष्ठान कैसे किया जा सकता है?
คัมภีร์ธรรมสูตรวางข้อวินิจฉัยไว้ชัดว่า “สตรีเป็นผู้เอนเอียงไปสู่อสัตย์” โอ้ลูกเอ๋ย! เมื่อสตรีเป็นผู้กล่าวเท็จแล้ว จะประกอบ “สหธรรม” คือหน้าที่ร่วมกัน โดยมีนางอยู่เคียงข้างได้อย่างไร?
युधिछिर उवाच