करन्धमो नरश्रेष्ठ: कथध्मोरक्ष नराधिप: । दक्षो5म्बरीष: कुकुरो रैवतश्न महायशा:,अब राजर्षियोंके नाम सुनो--राजा नृग, ययाति, नहुष, यदु, शक्तिशाली पूरु, धुन्धुमार, दिलीप, प्रतापी सगर, कृशाश्व, यौवनाश्व, चित्राश्व, सत्यवान्, दुष्यन्त, महायशस्वी चक्रवर्ती राजा भरत, पवन, जनक, राजा दृष्टरथ, नरश्रेष्ठ रघु, राजा दशरथ, राक्षसहन्ता वीरवर श्रीराम, शशबिन्दु, भगीरथ, हरिश्वन्द्र, मरुत्त, राजा दृढरथ, महोदर्य, अलर्क, नराधिप ऐल (पुरूरवा), नरश्रेष्ठ करन्धम, राजा कध्मोर, दक्ष, अम्बरीष, कुकुर, महायशस्वी रैवत, कुरु, संवरण, सत्यपराक्रमी मान्धाता, राजर्षि मुचुकुन्द, गंगाजीसे सेवित राजा जह्नु आदिराजा वेननन्दन पृथु, सबका प्रिय करनेवाले मित्रभानु, राजा त्रसहस्यु, राजर्षिश्रेष्ठ श्वेत, प्रसिद्ध राजा महाभिष, राजा निमि, अष्टक, आयु, राजर्षि क्षुप, राजा कक्षेयु, प्रतर्दन, दिवोदास, कोसलनरेश सुदास, पुरूरवा, राजर्षि नल, प्रजापति मनु, हविध्र, पृषध्र, प्रतीप, शान्तनु, अज, प्राचीनबर्हि, महायशस्वी इक्ष्वाकु, राजा अनरण्य, जानुजंघ, राजर्षि कक्षसेन तथा इनके अतिरिक्त पुराणोंमें जिनका अनेक बार वर्णन हुआ है, वे सब पुण्यात्मा राजा स्मरण करने योग्य हैं। जो मनुष्य प्रतिदिन सबेरे उठकर स्नान आदिसे शुद्ध हो प्रातः:काल और सांयकाल इन नामोंका पाठ करता है, वह धर्मके फलका भागी होता है
bhīṣma uvāca |
karandhamo naraśreṣṭhaḥ kathadhmorakṣa narādhipaḥ |
dakṣo 'mbharīṣaḥ kukuro raivataś ca mahāyaśāḥ ||
ภีษมะกล่าวว่า “(ต่อไป) จงฟังนามของราชฤๅษีผู้ประเสริฐเหล่านี้—กรันธมะ ผู้เลิศในหมู่มนุษย์; กถธมอระ ผู้เป็นนราธิป; ทักษะ; อัมพรีษะ; กุกุระ; และไรเวตะผู้มีเกียรติยศยิ่ง.”
भीष्म उवाच
Remembering and honoring exemplary rulers—figures associated with righteous conduct and good governance—is presented as a dharmic practice that supports ethical orientation and accrues religious merit.
Bhishma continues a catalog of celebrated kings/royal sages, naming several in succession as part of a longer litany whose recitation is praised.