लोकथर्मे च धर्मे च विशेषकरणं कृतम् । यथैकत्वं पुनर्यान्ति प्राणिनस्तत्र विस्तर:,अब मैं चारों वर्णोंका विशेषरूपसे लक्षण बता रहा हूँ। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शाद्र --इन चारों वर्णोंके शरीर पञड्च महाभूतोंसे ही बने हुए हैं और सबका आत्मा एक-सा ही है। फिर भी उनके लौकिक धर्म और विशेष धर्ममें विभिन्नता रखी गयी है। इसका उद्देश्य यही है कि सब लोग अपने-अपने धर्मका पालन करते हुए पुनः एकत्वको प्राप्त हों। इसका शास्त्रोंमें विस्तारपूर्वक वर्णन है
lokadharme ca dharme ca viśeṣakaraṇaṃ kṛtam | yathaikatvaṃ punaryānti prāṇinastatra vistaraḥ ||
ภีษมะกล่าวว่า—ได้กำหนดความแตกต่างไว้ระหว่างหน้าที่ทางโลกกับธรรมอันศักดิ์สิทธิ์ เหตุเพราะสรรพชีวิตเมื่อปฏิบัติธรรมตามส่วนของตน ย่อมกลับไปสู่ความเป็นหนึ่งได้; เรื่องนี้คัมภีร์กล่าวไว้โดยพิสดาร
भीष्म उवाच