त्रियुगौ पुण्डरीकाक्षौ वासुदेवधनञज्जयौ । विदितौ नारदादेतौ मम व्यासाच्च पार्थिव,पृथ्वीनाथ! कमलनयन! श्रीकृष्ण और अर्जुन--ये दोनों सत्ययुग आदि तीनों युगोंमें प्रकट होनेके कारण त्रियुग कहलाते हैं। देवर्षि नारद तथा व्यासजीने इन दोनोंके स्वरूपका परिचय दिया था
โอ้เจ้าแห่งแผ่นดิน! วาสุเทวะและธนัญชัย ผู้มีดวงเนตรดุจดอกบัว ทั้งสองเป็นที่รู้จักว่า ‘ตรียุค’ และสภาวะของทั้งคู่นี้เป็นที่ประจักษ์แก่ข้าพเจ้าโดยเดวฤๅษีนารทและบิดาของข้าพเจ้า คือพระวยาส
भीष्म उवाच