Adhyāya 152 — Bhīṣma’s Authorization for Yudhiṣṭhira’s Return to the Capital (नगरप्रवेशानुज्ञा)
अदिति: कश्यपस्याथ सर्वास्ता: पतिदेवता: । पृष्टाश्नोपासिताश्वैव तास्त्वया देवि नित्यश:,ब्रह्माजीकी पत्नी सावित्री साध्वी हैं। इन्द्रपत्नी शची भी सती हैं। विष्णुकी प्यारी पत्नी लक्ष्मी पतिव्रता हैं। इसी प्रकार यमकी भार्या धृति, मार्कण्डेयकी पत्नी धूमोर्णा, कुबेरकी स्त्री ऋद्धि, वरुणकी भार्या गौरी, सूर्यकी पत्नी सुवर्चला, चन्द्रमाकी साध्वी स्त्री रोहिणी, अग्निकी भार्या स्वाहा और कश्यपकी पत्नी अदिति--ये सब-की-सब पतितव्रता देवियाँ हैं। देवि! तुमने इन सबका सदा संग किया है और इन सबसे धर्मकी बात पूछी है
aditiḥ kaśyapasyātha sarvāstāḥ patidevatāḥ | pṛṣṭāśnupāsitāścaiva tāstvayā devi nityaśaḥ ||
อทิติ ชายาของกัศยป; และแท้จริงสตรีผู้ประเสริฐเหล่านั้นทั้งหมดล้วนยึดถือสามีดุจเทพเจ้า. โอ้เทวี เจ้าได้เข้าไปหา พินอบพิทักษ์รับใช้และให้เกียรติพวกนางอยู่เนืองนิตย์ และได้ไต่ถามพวกนางถึงความประพฤติอันชอบธรรม
श्रीमहेश्वर उवाच