शक्ररूपं स कृत्वा तु सर्वैर्देवगणैर्वृत: । सहस्राक्षस्तदा भूत्वा वज्रपाणिमहायशा:,उन्होंने सम्पूर्ण देवताओंसे घिरे हुए इन्द्रका रूप धारण करके पदार्पण किया। उस समय उनके सहख् नेत्र शोभा पा रहे थे। उन महायशस्वी इन्द्रके हाथमें वज्र प्रकाशित हो रहा था
แล้วพระองค์ทรงแปลงเป็นรูปพระศักระ (อินทรา) โดยมีหมู่เทพทั้งปวงรายล้อม ครั้นทรงเป็นสหัสรเนตร ผู้ทรงวัชระอันรุ่งเรือง ก็เสด็จปรากฏพระองค์
वासुदेव उवाच