भूमिदान-प्रसङ्गः । काश्यपी-पृथिवी तथा उतथ्य-वरुण-संवादः
Land-gift episode; Pṛthivī Kāśyapī; Utathya–Varuṇa dispute
तस्य धर्मफल नित्यं श्रद्दधाना निबोधत । साध्या रुद्रास्तथादित्या विश्वेदेवास्तथाश्विनौ,अब धर्मका यह दूसरा गुप्त रहस्य सुनो। पूर्णममासी तिथिको चन्द्रोदयके समय ताँबेके बर्तनमें मधु मिलाया हुआ पकवान लेकर जो चन्द्रमाके लिये बलि अर्पण करता है, उसे जिस नित्य धर्म-फलकी प्राप्ति होती है, उसका श्रद्धापूर्वक श्रवण करो। उस पुरुषकी दी हुई उस बलिको साध्य, रुद्र, आदित्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, मरुदगण और वसुदेवता भी ग्रहण करते हैं तथा उससे चन्द्रमा और समुद्रकी वृद्धि होती है। इस प्रकार मैंने रहस्यसहित सुखदायक धर्मका वर्णन किया है
Skanda uvāca | tasya dharma-phalaṁ nityaṁ śraddadhānā nibodhata | sādhya rudrās tathādityā viśve devās tathāśvinau ||
จงรู้ด้วยศรัทธาถึงผลแห่งธรรมอันยั่งยืนของการกระทำนั้น. เหล่าสาธยะ เหล่ารุทระ เหล่าอาทิตยะ วิศวเทวะ และคู่เทพอัศวิน ก็ร่วมรับบลีนั้นด้วย.
स्कन्द उवाच