मांसपरिवर्जन-प्रशंसा (Praise of Abstention from Meat) / Ethics of Ahiṃsā in Diet and Rite
अन्न मनुष्योंका प्राण है, अन्नसे ही प्राणीका जन्म होता है, अन्नके ही आधारपर सारा संसार टिका हुआ है। इसलिये अन्न सबसे उत्तम माना गया है ।। अन्नमेव प्रशंसन्ति देवर्षिपितृमानवा: । अन्नस्य हि प्रदानेन रन्तिदेवो दिवं गत:,देवता, ऋषि, पितर और मनुष्य अन्नकी ही प्रशंसा करते हैं। अन्नके ही दानसे राजा रन्तिदेव स्वर्गको प्राप्त हुए हैं
annaṁ manuṣyāṇāṁ prāṇaḥ; annād eva prāṇino janma bhavati; annādhāraṁ hi sarvaṁ jagat. tasmād annaṁ paramam iti manyate. annaṁ eva praśaṁsanti devarṣi-pitṛ-mānavāḥ. annasya hi pradānena rantidevo divaṁ gataḥ.
เหล่าเทพ ฤๅษี ปิตฤ และมนุษย์ทั้งหลาย ล้วนสรรเสริญอาหาร; เพราะด้วยการให้ทานอาหารนี่เอง พระราชารันติเฑวะจึงได้ไปสู่สวรรค์
युधिछ्िर उवाच