Ahiṃsā as Threefold Restraint (Mind–Speech–Action) and the Ethics of Consumption
बुहस्पतिर्वाच जीव: कर्मसमायुक्तः शीघ्र॑ रेतस्त्वमागत: । स्त्रीणां पुष्पं समासाद्य सूते कालेन भारत,बृहस्पतिजीने कहा--भारत! जीव अपने कर्मोंसे प्रेरित होकर शीघ्र ही वीर्यभावको प्राप्त होता है और स्त्रीके रजमें प्रविष्ट होकर समयानुसार जन्म धारण करता है
พระพฤหัสบดีตรัสว่า “โอ้ภารตะ ชีวะอาศัยแรงกรรมเป็นเหตุ จึงไปถึงภาวะแห่งเชื้อ (เรตัส) โดยเร็ว ครั้นอาศัยรชัสของสตรีแล้วเข้าสู่ที่นั้น ก็ย่อมรับกำเนิดตามกาล”
युधिछिर उवाच