ज्येष्ठ-कनिष्ठ-धर्मः — Duties of Elders and Juniors
Anuśāsana-parva 108
जो बूढ़ी, संन्यासिनी, पतिव्रता, नीच वर्णकी तथा ऊँचे वर्णकी स्त्री हो, उसके सम्पर्कसे दूर रहना चाहिये ।।
भीष्म उवाच