द्रोण उदाच त्वमन्नं प्राणिभिर्भुक्तमन्तर्भूतो जगत्पते । नित्यप्रवृद्धः पचसि त्वयि सर्व प्रतिष्ठितम्,द्रोण बोला--जगत्पते! आप ही शरीरके भीतर रहकर प्राणियोंद्वारा खाये हुए अन्नको सदा उद्दीप्त होकर पचाते हैं। सम्पूर्ण विश्व आपमें ही प्रतिष्ठित है
โทรณะกล่าวว่า— “ข้าแต่เจคัตปติ! พระองค์สถิตอยู่ภายในกาย คอยย่อยอาหารที่สรรพสัตว์บริโภคด้วยเปลวเพลิงอันรุ่งเรืองไม่ขาดสาย ทั้งปวงโลกตั้งมั่นอยู่ในพระองค์”
स्तम्बमित्र उवाच