Jarītā–Śārṅgā-saṃvāda: Ākhu-haraṇa and the Approach of Agni (आखुहरणं अग्न्यागमनश्च)
तत्र भूतान्यनेकानि रक्षतेडस्य प्रसड्भतः । तं॑ दिथक्षुर्न शकनोमि दग्धुं शक्रस्य तेजसा,उस तक्षक नागके प्रसंगसे ही यहाँ रहनेवाले और भी अनेक जीवोंकी वे रक्षा करते हैं, इसलिये इन्द्रके प्रभावसे मैं इस वनको जला नहीं पाता। परंतु मैं सदा ही इसे जलानेकी इच्छा रखता हूँ
พราหมณ์กล่าวว่า “ด้วยเหตุแห่งตักษกะ เขายังปกป้องสรรพสัตว์นานาที่อาศัยอยู่ ณ ที่นั้นด้วย เพราะเดชแห่งศักระ เราจึงไม่อาจเผาป่านี้ให้มอดไหม้ได้”
ब्राह्मण उवाच