Gaṅgādvāra-tīrtha, Ulūpī-saṃvāda, and Arjuna’s Dharma-Deliberation (गङ्गाद्वार-तीर्थम्, उलूपी-संवादः)
अर्ध राज्यस्य सम्प्राप्य खाण्डवप्रस्थमाविश । वहाँ रहते समय कोई तुम्हें बाधा नहीं दे सकता; क्योंकि जैसे वज्रधारी इन्द्र देवताओंकी रक्षा करते हैं, उसी प्रकार कुन्तीनन्दन अर्जुन वहाँ तुमलोगोंकी भलीभाँति रक्षा करेंगे। तुम आधा राज्य लेकर खाण्डवप्रस्थमें चलकर रहो
घतयाट्र उवाच