Vasiṣṭhasya śokaḥ, Vipāśā–Śatadrū-nāmākaraṇam, Kalmāṣapādasya bhaya-prasaṅgaḥ (Ādi Parva 167)
सो<ध्यारोहद् रथवरं तेन च प्रययौ तदा । ततः प्रणेदु: पञ्जाला: प्रह्ृष्ठा: साधु साथ्विति,वह कुमार उसी समय एक श्रेष्ठ रथपर जा चढ़ा, मानो उसके द्वारा युद्धके लिये यात्रा कर रहा हो। यह देखकर पांचालोंको बड़ा हर्ष हुआ और वे जोर-जोरसे बोल उठे, “बहुत अच्छा', “बहुत अच्छा',
กุมารนั้นขึ้นสู่รถศึกอันประเสริฐในทันที และเคลื่อนออกไปประหนึ่งออกเดินทางสู่สงคราม ครั้นเห็นดังนั้น ชาวปัญจาลก็ปลาบปลื้มยิ่งนัก แล้วเปล่งเสียงก้องว่า “สาธุ! สาธุ!”
ब्राह्मण उवाच