मन्दर-समुद्रमन्थन-वर्णनम् / Description of the Churning of the Ocean with Mount Mandara
स पुत्र: क्रोधसंरब्ध: शशापैनामिति श्रुति: । यो5हमेवं कृतो मातस्त्वया लोभपरीतया,सुना जाता है, उस पुत्रने क्रोधके आवेशमें आकर विनताको शाप दे दिया--“माँ! तूने लोभके वशीभूत होकर मुझे इस प्रकार अधूरे शरीरका बना दिया--मैरे समस्त अंगोंको पूर्णतः: विकसित एवं पुष्ट नहीं होने दिया; इसलिये जिस सौतके साथ तू लाग-डाँट रखती है, उसीकी पाँच सौ वर्षोतक दासी बनी रहेगी
เล่ากันว่า บุตรนั้นเดือดดาลด้วยโทสะแล้วสาปวินตา—“แม่เอ๋ย! เพราะถูกความโลภครอบงำ เจ้าจึงทำให้ข้าเป็นเช่นนี้ มิให้กายของข้าสมบูรณ์เต็มที่ ดังนั้นต่อสตรีร่วมสามีผู้ซึ่งเจ้าชิงดีชิงเด่นด้วย เจ้าจักต้องอยู่เป็นทาสภายใต้อำนาจนาง”
शौनक उवाच