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Shloka 47

श्रीनगर-त्रिपुरा-सप्तकक्षा-पालकदेवताप्रकाशनम्

Revelation of the Guardian Deities of Śrīnagara-Tripurā’s Seven Enclosures

कर्मक्षये पुनर्यान्ति भूलोके मानुषीं तनुम् / पूर्ववासनया युक्ताः पुनरर्चन्ति चक्रिणीम् / पुनर्यान्ति श्रीनगरे शक्रनीलमहास्थलीम्

karmakṣaye punaryānti bhūloke mānuṣīṃ tanum / pūrvavāsanayā yuktāḥ punararcanti cakriṇīm / punaryānti śrīnagare śakranīlamahāsthalīm

เมื่อกรรมสิ้นลง พวกเขากลับมาสู่ภูโลกถือกำเนิดเป็นมนุษย์อีกครั้ง; ด้วยวาสนาเดิมจึงบูชาพระเทวีจักรินีอีก แล้วจึงกลับไปยังศรีนคร ณ มหาสถานศักรนีลอีกครา।

कर्म-क्षयेat the exhaustion of karma
कर्म-क्षये:
अधिकरण (Adhikaraṇa)
TypeNoun
Rootकर्मन् (प्रातिपदिक) + क्षय (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, सप्तमी-विभक्ति, एकवचन (Loc. sg. m.); समासः: कर्मणः क्षयः (षष्ठी-तत्पुरुष)
पुनःagain
पुनः:
क्रियाविशेषण (Adverbial)
TypeIndeclinable
Rootपुनः (अव्यय)
Formकाल/पुनरावृत्ति-वाचक-अव्यय (adverb: again)
यान्तिthey go
यान्ति:
क्रिया (Kriyā)
TypeVerb
Rootया (धातु)
Formलट्-लकार (Present), प्रथम-पुरुष, बहुवचन, परस्मैपद
भू-लोकेin the earthly world
भू-लोके:
अधिकरण (Adhikaraṇa)
TypeNoun
Rootभू (प्रातिपदिक) + लोक (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, सप्तमी-विभक्ति, एकवचन (Loc. sg. m.); समासः: भुवः लोकः (षष्ठी-तत्पुरुष)
मानुषीम्human
मानुषीम्:
कर्म-विशेषण (Qualifier of Karma)
TypeAdjective
Rootमानुषी (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, द्वितीया-विभक्ति, एकवचन (Acc. sg. f.)
तनुम्body
तनुम्:
कर्म (Karma)
TypeNoun
Rootतनु (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, द्वितीया-विभक्ति, एकवचन (Acc. sg. f.)
पूर्व-वासनयाby former impressions
पूर्व-वासनया:
करण (Karaṇa)
TypeNoun
Rootपूर्व (प्रातिपदिक) + वासना (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, तृतीया-विभक्ति, एकवचन (Instr. sg. f.); समासः: पूर्वा वासना (कर्मधारय)
युक्ताःendowed/connected
युक्ताः:
कर्ता-विशेषण (Predicate adjective of Karta)
TypeVerb
Rootयुज् (धातु)
Formभूतकृदन्त (क्त/PPP), प्रथमा-विभक्ति, बहुवचन, पुल्लिङ्ग (Nom. pl. m.)
पुनःagain
पुनः:
क्रियाविशेषण (Adverbial)
TypeIndeclinable
Rootपुनः (अव्यय)
Formपुनरावृत्ति-वाचक-अव्यय (adverb)
अर्चन्तिthey worship
अर्चन्ति:
क्रिया (Kriyā)
TypeVerb
Rootअर्च् (धातु)
Formलट्-लकार (Present), प्रथम-पुरुष, बहुवचन, परस्मैपद
चक्रिणीम्the discus-bearing goddess (Cakriṇī)
चक्रिणीम्:
कर्म (Karma)
TypeNoun
Rootचक्रिणी (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, द्वितीया-विभक्ति, एकवचन (Acc. sg. f.)
पुनःagain
पुनः:
क्रियाविशेषण (Adverbial)
TypeIndeclinable
Rootपुनः (अव्यय)
Formपुनरावृत्ति-वाचक-अव्यय (adverb)
यान्तिthey go
यान्ति:
क्रिया (Kriyā)
TypeVerb
Rootया (धातु)
Formलट्-लकार (Present), प्रथम-पुरुष, बहुवचन, परस्मैपद
श्री-नगरेin Śrī-city
श्री-नगरे:
अधिकरण (Adhikaraṇa)
TypeNoun
Rootश्री (प्रातिपदिक) + नगर (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग, सप्तमी-विभक्ति, एकवचन (Loc. sg. n.); समासः: श्रियाः नगरम् (षष्ठी-तत्पुरुष)
शक्र-नील-महा-स्थलीम्the great ground called Śakra-nīla
शक्र-नील-महा-स्थलीम्:
कर्म (Karma)
TypeNoun
Rootशक्र (प्रातिपदिक) + नील (प्रातिपदिक) + महा (प्रातिपदिक) + स्थली (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, द्वितीया-विभक्ति, एकवचन (Acc. sg. f.); बहुपद-कर्मधारयः: शक्रनीला च सा महास्थली (descriptive compound)