अध्याय ५०: उत्तरेण सह अर्जुनस्य रथप्रयाणे ध्वजचिह्नैः कौरवसेनानिर्देशः
Arjuna directs Uttara by identifying Kaurava commanders through banners
यं यमेषो5तिसंक्रुद्धः संग्रामे निपतिष्यति । वृक्ष गरुत्मान् वेगेन विनिहत्य तमेष्यति,जैसे गरुड़ जिस-जिस वृक्षपर पैर रखते हैं, अपने वेगसे उसे गिराकर चले जाते हैं, उसी प्रकार अर्जुन अत्यन्त क्रोधमें भरकर संग्रामभूमिमें जिस-जिस महारथीपर आक्रमण करेंगे, उसे नष्ट करके ही आगे बढ़ेंगे
yaṃ yameṣo ’tisaṃkruddhaḥ saṃgrāme nipatiṣyati | vṛkṣaṃ garutmān vegena vinihatya tameṣyati ||
యమేషుడు—అర్జునుడు—అత్యంత కోపంతో యుద్ధంలో ఎవరి మీద పడితే, వారిని తన వేగంతో సంహరించి ముందుకు సాగిపోతాడు; గరుడుడు చెట్టుపై వాలగానే తన వేగంతో దానిని విరిచివేసి ముందుకు ఎగిరిపోవునట్లు.
कृप उवाच