Draupadī’s Grief at Seeing the Heroes in Disguise (द्रौपदी-विषादः / वेष-परिभव-वर्णनम्)
सदस्यं यमुपासीनं परस्य प्रियवादिनम् । दृष्टवा युधिष्ठिरं कोपो वर्धते मामसंशयम्,एक सामान्य सदस्यकी हैसियतसे दूसरेकी सेवामें बैठे हुए वे विराटके मनको प्रिय लगनेवाली बातें करते हैं। महाराज युधिष्ठिरको इस दशामें देखकर निश्चय ही मेरा क्रोध बढ़ जाता है
సాధారణ సభ్యుడిలా మరొకరి సేవలో కూర్చుని, విరాటునికి ఇష్టమైన మాటలు పలుకుతున్న యుధిష్ఠిరుణ్ని ఈ స్థితిలో చూసి నా కోపం నిస్సందేహంగా పెరుగుతోంది।
वैशम्पायन उवाच