Sudeva Identifies Damayantī in Cedi (सुदेवेन दमयन्ती-परिचयः)
ददृशुर्वणिजो रम्यं प्रभूतयवसेन्धनम् । बहुपुष्पफलोपेतं नानापक्षिनिषेवितम्,तदनन्तर बहुत समयके बाद एक भयंकर विशाल वनमें पहुँचकर उन व्यापारियोंने एक महान् सरोवर देखा, जिसका नाम था, पद्मसौगन्धिक। वह सब ओरसे कल्याणप्रद जान पड़ता था। उस रमणीय सरोवरके पास घास और ईंधनकी अधिकता थी, फूल और फल भी वहाँ प्रचुर मात्रामें उपलब्ध होते थे। उस तालाबपर बहुत-से पक्षी निवास करते थे
Bṛhadaśva uvāca: dadṛśur vaṇijo ramyaṁ prabhūtayavasendhanam | bahupuṣpaphalopetaṁ nānāpakṣiniṣevitam ||
బృహదశ్వుడు అన్నాడు—వ్యాపారులు ఒక రమణీయ స్థలాన్ని చూశారు; అక్కడ గడ్డి, ఇంధనం సమృద్ధిగా ఉండి, పుష్పఫలాలు విరివిగా ఉండేవి; అనేక రకాల పక్షులు అక్కడ నివసించేవి।
बृहदश्चव उवाच