सीता-रावण-संवादः
Sītā–Rāvaṇa Dialogue in the Aśoka Grove
अप्सरा देवकन्या वा माया वा देवनिर्मिता । इति कृत्वाञ्जलिं सर्वे ददृशुस्तामनिन्दिताम्,जयद्रथ और उसके सभी साथियोंने उस अनिन््द्य सुन्दरीकी ओर देखा और वे हाथ जोड़कर मन-ही-मन यह विचार करने लगे--'यह कोई अप्सरा है या देवकन्या अथवा देवताओंकी रची हुई माया है?”
జయద్రథుడూ అతని సహచరులందరూ ఆ అనింద్యసుందరిని చూచి అంజలి ఘటించి మనసులో ఇలా తలచిరి—“ఇది అప్సరసా? దేవకన్యా? లేక దేవతలు నిర్మించిన మాయా?”
वैशम्पायन उवाच