रामस्य पम्पातीरगमनम्, सुग्रीवसख्यं, वालिवधः, सीतारक्षणवृत्तान्तश्च
Rāma at Pampā; alliance with Sugrīva; Vālin’s fall; Sītā’s guarded captivity
विधिवत् पूजयित्वा तमातिथ्येन न्यमन्त्रयत् । आह्रिकं भगवन् कृत्वा शीघ्रमेहीति चाब्रवीत्,श्रीमान् राजा युधिष्ठिर अतिथिको आते देख भाइयोंसहित उनके सम्मुख गये। वे अपनी मर्यादासे कभी च्युत नहीं होते थे। उन्होंने उन अतिथिदेवताको लाकर श्रेष्ठ आसनपर आदरपूर्वक बैठाया और हाथ जोड़कर प्रणाम किया। फिर विधिपूर्वक पूजा करके उन्हें अतिथिसत्कारके रूपमें निमन्त्रित किया और कहा--“भगवन्! अपना नित्य नियम पूरा करके (भोजनके लिये) शीघ्र पधारिये”
vidhivat pūjayitvā tam ātithyena nyamantrayāt | āhrikaṁ bhagavan kṛtvā śīghram ehīti cābravīt |
విధివిధానముగా పూజించి రాజు అతిథిసత్కారముగా ఆహ్వానించెను. తరువాత—“భగవన్! మీ నిత్యకర్మను పూర్తి చేసి శీఘ్రముగా రండి” అని పలికెను.
वैशम्पायन उवाच