हिरण्यपुरवर्णनम्
Description of Hiraṇyapura and the Nivātakavacas
यस्मादलं समस्तास्ता: पतन्ति जलमूर्तय: । तस्मात् पातालमित्येव ख्यायते पुरमुत्तमम्,जलस्वरूप जितनी भी वस्तुएँ हैं, वे सब वहाँ पर्याप्तरूपसे गिरती हैं, इसलिये ('पतन्ति अलम्” इस व्युत्पतिके अनुसार पात+अलम्--इन दोनों शब्दोंके योगसे) यह उत्तम नगर “पाताल” कहलाता है
జలస్వరూపమైన సమస్త వస్తువులు అక్కడ సమృద్ధిగా పడిపోతాయి; అందువల్ల ఆ ఉత్తమ నగరం ‘పాతాళం’ అని ప్రసిద్ధి చెందింది.
नारद उवाच