उद्योगपर्व — धृतराष्ट्रस्य दुर्योधनप्रति शक्तिस्मारक-उपदेशः
Udyoga Parva 63: Dhṛtarāṣṭra’s Counsel Reminding Duryodhana of Opponent Strength
ट्रुपदो मत्स्यराजश्न संक्रुद्धक्ष धनंजय: । न शेषयेयु: समरे वायुयुक्ता इवाग्नय:,राजा द्रुपद, मत्स्यनरेश विराट और क्रोधमें भरा हुआ अर्जुन--ये तीनों वायुका सहारा पाकर प्रज्वलित हुई त्रिविध अग्नियोंके समान जब युद्धभूमिमें आक्रमण करेंगे, तब किसीको जीता नहीं छोड़ेंगे
రాజా ద్రుపదుడు, మత్స్యరాజు విరాటుడు, క్రోధంతో మండుతున్న ధనంజయ అర్జునుడు—ఈ ముగ్గురు సమరభూమిలో వాయుసహాయంతో జ్వలించే మూడు అగ్నులవలె దూకితే, ఎవ్వరినీ జీవించి మిగలనీయరు.
विदुर उवाच