Udyoga Parva, Adhyāya 55 — Sañjaya’s Report on Pāṇḍava Readiness and Arjuna’s Dhvaja
इस प्रकार श्रीमह्याभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें दुर्योधनवाक्यविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ५५ ॥। अपन प्रात बछ। अफड-्-क्ज षट्पज्चाशत्तमो< ध्याय: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिढके घोड़ोंका वर्णन दुर्योधन उवाच अक्षौहिणी: सप्त लब्ध्वा राजभि: सह संजय । किंस्विदिच्छति कौन्तेयो युद्धप्रेप्सुर्युधिछ्िर:,दुर्योधनने पूछा--संजय! यह तो बताओ, सात अक्षौहिणी सेना पाकर राजाओंसहित कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर युद्धकी इच्छासे अब कौन-सा कार्य करना चाहते हैं?
duryodhana uvāca | akṣauhiṇīḥ sapta labdhvā rājabhiḥ saha sañjaya | kiṃ svid icchati kaunteyo yuddha-prepsur yudhiṣṭhiraḥ ||
దుర్యోధనుడు అన్నాడు—సంజయా! రాజులతో కలిసి ఏడు అక్షౌహిణీ సేనలను పొందిన యుద్ధాభిలాషి కుంతీపుత్రుడు యుధిష్ఠిరుడు ఇప్పుడు ఏమి చేయదలచుకున్నాడు?
दुर्योधन उवाच