Udyoga-parva Adhyāya 50 — Dhṛtarāṣṭra’s Appraisal of Bhīmasena (भीमसेनभयवर्णनम्)
क्रोशतो मे न शृण्वन्ति बाला: पण्डितमानिन: । विषम न हि मन्यन्ते प्रपातं मधुदर्शिन:,मैं चीखता-चिल्लाता रह जाता हूँ, परंतु अपनेको पण्डित समझनेवाले ये मूर्ख पुत्र मेरी बात नहीं सुनते हैं। ये केवल वृक्षकी ऊँची शाखामें लगे हुए शहदको देखते हैं, वहाँसे गिरनेका जो भयानक खटका है, उसकी ओर इनका ध्यान नहीं है
krośato me na śṛṇvanti bālāḥ paṇḍitamāninaḥ | viṣamaṃ na hi manyante prapātaṃ madhudarśinaḥ ||
నేను ఎంతగా కేకలు వేసినా, పండితులమని భావించే నా బాలులైన కుమారులు నా మాట వినరు. వారు చెట్టుపై ఎత్తున ఉన్న తేనెనే చూస్తారు; కానీ అక్కడి నుంచి పడిపోవడమనే భయంకర ప్రమాదాన్ని లెక్కచేయరు.
धृतराष्ट उवाच