Ambā’s Vow of Tapas after Paraśurāma’s Assessment (अम्बाया तपोव्रतनिश्चयः)
अस्मद्वधार्थ निश्चित्य तपो घोरं समास्थित: । ऋते कन्यां महादेव पुत्रो मे स्यादिति ब्रुवन्,निवर्तस्व महीपाल नैतज्जात्वन्यथा भवेत् | हमलोगोंके वधके लिये पुत्र पानेका निश्चित संकल्प लेकर उन्होंने यह कहते हुए घोर तपस्या की थी कि “महादेव! मुझे कन्या नहीं, पुत्र प्राप्त हो। भगवन्! मैं भीष्मसे बदला लेनेके लिये पुत्र चाहता हूँ"। यह सुनकर देवाधिदेव महादेवजीने कहा--“भूपाल! तुम्हें पहले कन्या प्राप्त होगी, फिर वही पुरुष हो जायगी। अब तुम लौटो। मैंने जो कहा है वह कभी मिथ्या नहीं हो सकता'
bhīṣma uvāca | asmad-vadhārthaṁ niścitya tapo ghoraṁ samāsthitaḥ | ṛte kanyāṁ mahādeva putro me syād iti bruvan nivartasva mahīpāla naitaj jātva anyathā bhavet |
భీష్ముడు పలికెను—మమ్మల్ని సంహరించుటకై కుమారుని పొందుదామని నిశ్చయించి అతడు ఘోర తపస్సు చేసి—“ఓ మహాదేవా! కన్య కాదు, నాకు కుమారుడే కలుగుగాక” అని పలికెను. అది విని దేవాధిదేవుడు మహాదేవుడు అన్నాడు—“ఓ మహీపాలా, ముందుగా నీకు కుమార్తె కలుగును; తరువాత ఆమెనే పురుషుడగును. తిరిగి పో—నేను పలికినది ఎప్పుడూ ఇతరథా కాదును.”
भीष्म उवाच