भीष्मस्वप्न-स्मृत्युपाख्यानम् | Bhīṣma’s Dream-Linked Recollection of the Paraśurāma Combat
अपि चैतन्मया राजन् नारदे5पि निवेदितम् | व्यासे चैव तथा कार्य तौ चोभौ मामवोचताम्,राजन! मैंने यह वृत्तान्त देवर्षि नारद और महर्षि व्याससे भी निवेदन किया था। उस समय उन दोनोंने मुझसे कहा--“भीष्म! तुम्हें काशिराजकी कनन््याके विषयमें तनिक भी विषाद नहीं करना चाहिये। दैवके विधानको पुरुषार्थके द्वारा कौन टाल सकता है?”
api caitanmāyā rājan nārade ’pi niveditam | vyāse caiva tathā kārya tau cobhau mām avocatām ||
రాజా! ఈ వృత్తాంతమును నేను దేవర్షి నారదునికీ నివేదించితిని; అలాగే మహర్షి వ్యాసునికీ తెలియజేయవలసినదే. అప్పుడు ఆ ఇద్దరూ నన్ను ఇలా పలికిరి—“రాజా, కాశిరాజుని కుమార్తె విషయమున నీవు కించిత్తు కూడ విషాదపడకూడదు; దైవవిధానమును మానవప్రయత్నముతో ఎవడు తిప్పివేయగలడు?”
राम उवाच