अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
प्रणम्य तमहं मूर्थ्ना भूयो ब्राह्मणसत्तमम् । अब्रुवं कारणं कि तद् यत् त्वं युद्ध मयेच्छसि,तब मैंने उन ब्राह्मणशिरोमणिके चरणोंमें मस्तक झुकाकर पुनः प्रणाम किया और इस प्रकार पूछा--“भगवन्! क्या कारण है कि आप मेरे साथ युद्ध करना चाहते हैं? बाल्यावस्थामें आपने ही मुझे चार प्रकारके धरनुर्वेदकी शिक्षा दी है। महाबाहु भार्गव! मैं तो आपका शिष्य हूँ"
praṇamya tam ahaṃ mūrdhnā bhūyo brāhmaṇasattamam | abruvaṃ kāraṇaṃ kiṃ tad yat tvaṃ yuddham icchasi ||
అప్పుడు నేను ఆ బ్రాహ్మణోత్తమునికి శిరస్సు వంచి మరల నమస్కరించి ఇలా అడిగాను—“భగవన్! మీరు యుద్ధం చేయదలచడానికి కారణం ఏమిటి?”
राम उवाच