Adhyāya 152: Kaurava-sainyavibhāgaḥ
Division and Standardization of the Kaurava Host
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं विस्तरेण तपोधन । कुरूणां पाण्डवानां च यद् यदासीद् विचेष्टितम्,तपोधन! पाण्डव, भगवान् श्रीकृष्ण, विराट, ट्रुपद, पांचालराजकुमार धूष्टद्युम्न, महारथी शिखण्डी तथा देवताओंके लिये भी दुर्जय महापराक्रमी युधामन्यु--ये सब तो संग्राममें एकत्र होनेपर इन्द्रसहित सम्पूर्ण देवताओंको भी पीड़ित कर सकते हैं; अतः वहाँ कौरवों तथा पाण्डवोंने जो-जो कर्म किया था वह सब विस्तारपूर्वक सुननेकी मेरी इच्छा है
janamejaya uvāca |
etad icchāmy ahaṃ śrotuṃ vistareṇa tapodhana |
kurūṇāṃ pāṇḍavānāṃ ca yad yad āsīd viceṣṭitam ||
తపోధన! కౌరవులు, పాండవులు చేసిన ప్రతి కార్యం—ప్రతి చలనం, ప్రతి యుక్తి—అన్నిటినీ నేను విస్తారంగా వినదలచుకున్నాను.
जनमेजय उवाच