राजधर्मस्य नवनीतम्—रक्षा, दण्ड, चार, उत्थान
Rājadharma’s ‘Essence’: Protection, Punishment, Intelligence, and Royal Diligence
बलानां हर्षणं नित्यं प्रजानामन्ववेक्षणम् । कार्येष्वखेद: कोशस्य तथैव च विवर्धनम्,युधिष्ठिर! गुप्तचर (जासूस) रखना, दूसरे राष्ट्रोमें अपना प्रतिनिधि (राजदूत) नियुक्त करना, सेवकोंको उनके प्रति ईर्ष्या न रखते हुए समयपर वेतन और भत्ता देना, युक्तिसे कर लेना, अन्यायसे प्रजाके धनको न हड़पना, सत्पुरुषोंका संग्रह करना, शूरता, कार्यदक्षता, सत्यभाषण, प्रजाका हित-चिन्तन, सरल या कुटिल उपायोंसे भी शत्रुपक्षमें फूट डालना, पुराने घरोंकी मरम्मत एवं मन्दिरोंका जीर्णोद्धार कराना, दीन-दुखियोंकी देखभाल करना, समयानुसार शारीरिक और आर्थिक दोनों प्रकारके दण्डका प्रयोग करना, साधु पुरुषोंका त्याग न करना, कुलीन मनुष्योंको अपने पास रखना, संग्रहयोग्य वस्तुओंका संग्रह करना, बुद्धिमान् पुरुषोंका सेवन करना, पुरस्कार आदिके द्वारा सेनाका हर्ष और उत्साह बढ़ाना, नित्य-निरन्तर प्रजाकी देख-भाल करना, कार्य करनेमें कष्टका अनुभव न करना, कोषको बढ़ाना, नगरकी रक्षाका पूरा प्रबन्ध करना, इस विषयमें दूसरोंके विश्वासपर न रहना, पुरवासियोंने अपने विरुद्ध कोई गुटबंदी की हो तो उसमें फ़ूट डलवा देना, शत्रु, मित्र और मध्यस्थोंपर यथोचित दृष्टि रखना, दूसरोंके द्वारा अपने सेवकोंमें भी गुटबंदी न होने देना, स्वयं ही अपने नगरका निरीक्षण करना, स्वयं किसीपर भी पूरा विश्वास न करना, दूसरोंको आश्वासन देना, नीतिधर्मका अनुसरण करना, सदा ही उद्योगशील बने रहना, शत्रुओंकी ओरसे सावधान रहना और नीच कर्मों तथा दुष्ट पुरुषोंको सदाके लिये त्याग देना--ये सभी राज्यकी रक्षाके साधन हैं
bhīṣma uvāca | balānāṁ harṣaṇaṁ nityaṁ prajānām anvavekṣaṇam | kāryeṣv akhedaḥ kośasya tathaiva ca vivardhanam, yudhiṣṭhira |
భీష్ముడు పలికెను—ఓ యుధిష్ఠిరా, రాజ్యరక్షణకు ఇవి కూడా ఉపాయాలు: సైన్యాన్ని నిత్యం హర్షోల్లాసాలతో ఉత్సాహపరచడం, ప్రజలపై నిరంతర పర్యవేక్షణ ఉంచడం, రాజకార్యాలలో అలసట గాని నిర్లక్ష్యం గాని రానీయకపోవడం, అలాగే ఖజానాను క్రమంగా వృద్ధి చేయడం।
भीष्म उवाच
A ruler preserves the state through four continuous disciplines: keep the army encouraged, watch over the people directly, remain untiring in public duties, and steadily strengthen the treasury. The verse frames governance as sustained vigilance and responsible stewardship rather than occasional action.
In the Shanti Parva’s instruction on rajadharma, Bhishma—lying on his bed of arrows—teaches Yudhishthira practical principles of kingship. This verse is a compact summary of key administrative priorities: morale, public welfare oversight, diligent execution of tasks, and fiscal growth.