Bhīṣma on the Śara-Śayyā: Yudhiṣṭhira and Kṛṣṇa Approach the Eldest for Śānti
काम॑ नैतत् तवाख्येयं प्राणिनां प्रभवाप्ययौ । उपदेष्टूं भवान् शक्तो देवानामपि भारत,“भरतनन्दन! अवश्य ही आपके सामने यह कहना उचित न होगा कि “सभी प्राणियोंके जन्म और मरण प्रारब्धके अनुसार नियत हैं। अतः आपको दैवका विधान समझकर अपने मनमें कोई दुःख नहीं मानना चाहिये।! आपको कोई क्या उपदेश देगा? आप तो देवताओंको भी उपदेश देनेमें समर्थ हैं
Vaiśampāyana uvāca: kāmaṁ naitat tavākhyeyaṁ prāṇināṁ prabhavāpyayau | upadeṣṭuṁ bhavān śakto devānām api bhārata ||
భారతా! ప్రాణుల జననమరణాలు విధివశంగా నిర్ణీతమని మీకు చెప్పడం సముచితం కాదు. మీకు ఎవరు ఉపదేశించగలరు? మీరు దేవతలకూ ఉపదేశించగల సమర్థులు.
वैशम्पायन उवाच