शान्ति पर्व (अध्याय 38): युधिष्ठिरस्य राजधर्म-जिज्ञासा तथा भीष्मोपसर्पण-प्रस्तावना | Shanti Parva Chapter 38: Yudhishthira’s Inquiry into Rajadharma and the Prelude to Approaching Bhishma
तव कर्माण्यमोघानि व्रतचर्या च भाविनि । वे बोलीं--“कल्याणि! पाञज्चालराजकुमारी! तुम धन्य हो, जो इन पाँच महान् पुरुषोंकी सेवामें उसी प्रकार उपस्थित रहती हो, जैसे गौतमवंशमें उत्पन्न हुई जटिला अनेक महर्षियोंकी सेवा करती हैं। भाविनि! तुम्हारे सभी पुण्यकर्म अमोघ हैं और समस्त व्रतचर्या सफल है'
tava karmāṇy amoghāni vratacaryā ca bhāvini |
ఆమె చెప్పెను—“ఓ భావిని! నీ కర్మలు అమోఘమైనవి; నీ వ్రతాచరణ కూడా నిశ్చయంగా ఫలిస్తుంది.”
वैशम्पायन उवाच