यस्मिन् यस्मिंश्व विषये यो यो याति विनिश्चयम् । स तमेवाभिजानाति नान््यं भरतसत्तम,भरतश्रेष्ठ! जो-जो मनुष्य जिस-जिस विषय-स्वर्ग या मोक्षके लिये साधन करके उसमें सुनिश्चित सफलताको प्राप्त कर लेता है, उसी साधन या धर्मको वह श्रेष्ठ समझता है, दूसरेको नहीं
భరతశ్రేష్ఠా! ఎవడు ఏ విషయములో (స్వర్గమో మోక్షమో పొందుటకు సాధనమని) దృఢనిశ్చయమునకు చేరుతాడో, వాడు దానినే శ్రేష్ఠమని భావించును; ఇతరమును కాదు.
भीष्म उवाच