अग्नीषोमोत्पत्तिः
Agni–Soma Origin and the Brahmāgnīṣomīya Doctrine
योडसौ वहति भूतानां विमानानि विहायसा । चतुर्थ: संवहो नाम वायु: स गिरिमर्दन:,“जिसके द्वारा इधर-उधर ले जाये गये अनेक प्रकारके महामेघ घटा बाँधकर जल बरसाना आरम्भ करते हैं, घटाके रूपमें घनीभूत होनेपर भी जिसकी प्रेरणासे सारे बादल फट जाते हैं, फिर वे वेणुनादके समान शब्द करनेके कारण “नद” कहलाते हैं तथा प्राणियोंकी रक्षाके लिये पुन: जलका संग्रह करके घनीभूत हो जाते हैं, जो वायु देवताओंके आकाश शभमार्गसे जानेवाले विमानोंको स्वयं ही वहन करता है, वह पर्वतोंका मान मर्दन करनेवाला चतुर्थ वायु 'संवह' नामसे प्रसिद्ध है
yo 'sau vahati bhūtānāṁ vimānāni vihāyasā | caturthaḥ saṁvaho nāma vāyuḥ sa girimardanaḥ ||
ఆకాశమార్గంలో భూతజనుల విమానాలను మోసుకుపోయే ఆ వాయువు, పర్వతమర్దకుడైన నాలుగవ వాయు ‘సంవహ’ అని ప్రసిద్ధి.
भीष्म उवाच