Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
मेरी तो यह धारणा है कि गेरुआ वस्त्र पहनना, मस्तक मुड़ा लेना तथा त्रिदण्ड और कमण्डलु धारण करना--ये सब उत्कृष्ट संन्यासमार्गका परिचय देनेवाले चिह्नमात्र हैं। इनके द्वारा मोक्षकी सिद्धि नहीं होती ।। यदि सत्यपि लिड्रेडस्मिन् ज्ञानमेवात्र कारणम् | निर्मोक्षायेह दुःखस्य लिडमात्र निरर्थकम्,यदि इन चिह्ढोंके रहते हुए भी यहाँ दुःखसे सर्वथा मोक्ष पानेके लिये एकमात्र ज्ञान ही उपाय है तो जितने भी चिह्न धारण किये जाते हैं, वे सब निरर्थक हैं
janaka uvāca | yadi saty api liṅgair asmin jñānam evātra kāraṇam | nirmokṣāyeha duḥkhasya liṅgamātraṃ nirarthakam ||
జనకుడు అన్నాడు—ఇక్కడ దుఃఖం నుండి సంపూర్ణ విముక్తికి నిజమైన కారణం జ్ఞానమే అయితే, ఈ బాహ్య చిహ్నమాత్రం వ్యర్థం. కాషాయం, ముండనం, త్రిదండం, కమండలూ—ఇవి మార్గసూచకాలు కావచ్చు; కాని మోక్షం జ్ఞానంతోనే సిద్ధిస్తుంది.
जनक उवाच