Jarā-Mṛtyu-anatikrama: Janaka–Pañcaśikha-saṃvāda
Aging and Death Cannot Be Overstepped
अयमत्र भवेद् बन्धुरनेन सह मे क्षमम् । साम्यमेकत्वमायातो यादृशस्तादृशस्त्वहम्,“वास्तवमें इस जगत्के भीतर यह परमात्मा ही मेरा बन्धु है। इसीके साथ मेरी मैत्री हो सकती है। पहले मैं कैसा भी क्यों न रहा होऊँ, इस समय तो मैं इसकी समानता और एकताको प्राप्त हो चुका हूँ, जैसा वह है वैसा ही मैं हूँ
ayam atra bhaved bandhur anena saha me kṣamam | sāmyam ekatvam āyāto yādṛśas tādṛśas tv aham ||
ఈ లోకంలో నిజంగా పరమాత్మనే నా బంధువు; ఆయనతోనే నా స్నేహం యథార్థంగా నిలుస్తుంది. నేను ముందెట్లా ఉన్నా, ఇప్పుడు ఆయనతో సమత్వం, ఏకత్వం పొందాను—ఆయన ఎలా ఉన్నాడో, నేనూ అలాగే ఉన్నాను.
वसिष्ठ उवाच