अध्याय २९४ — योगलक्षणम् तथा सांख्यपरिसंख्यानम्
Yoga Definition and Sāṃkhya Enumeration
नित्यं त्रयाणां वर्णानां शुश्रूषु: शूद्र उच्यते,शूद्रको तीनों वर्णोंका नित्य सेवक बताया जाता है। यदि ब्राह्मण जीविकाके अभावमें क्षत्रिय अथवा वैश्यके धर्मसे जीवन-निर्वाह करे तो वह पतित नहीं होता है; किंतु जब वह शूद्रके धर्मको अपनाता है, तब तत्काल पतित हो जाता है
nityaṁ trayāṇāṁ varṇānāṁ śuśrūṣuḥ śūdra ucyate
మూడు (ఉన్నత) వర్ణముల సేవలో నిత్యము నిమగ్నుడైనవాడే శూద్రుడని చెప్పబడును.
पराशर उवाच