पापात्म-धर्मात्म-लक्षणम् तथा निर्वेदेन मोक्षमार्गः | Marks of the Sinful and the Righteous; Dispassion (Nirveda) as a Path to Liberation
दम्पत्यो: प्राणसंश्लेषे योडभिसंधि: कृत: किल । त॑ माता च पिता चेति भूतार्थो मातरि स्थित:,“पति और पत्नी मैथुनकालमें सुयोग्य पुत्र होनेके लिये जो अभिलाषा करते हैं, उसे यद्यपि पिता और माता-दोनों धारण करते हैं तथापि वास्तवमें वह अभिलाषा मातामें ही प्रतिष्ठित होती है
దంపతుల ప్రాణసంశ్లేషంలో (సంభోగకాలంలో) చేయబడే అభిసంధి/ఆకాంక్షను తల్లి, తండ్రి ఇద్దరూ కలిగి ఉన్నా, దాని యథార్థ స్థితి మాత్రం తల్లిలోనే నిలిచి ఉంటుంది.
भीष्म उवाच