कपिलगोसंवादे गृहस्थ-त्यागधर्मयोः प्रमाण्यविचारः
Kapila–Cow Dialogue: Authority of Householder and Renunciant Dharmas
अग्नीन् परिचरन् सम्यक् स्वाध्यायपरमो द्विज: । वानप्रस्थविधानज्ञों जाजलिज्वलित: श्रिया,भीष्मजीने कहा--बेटा! जाजलि मुनि महान् तपस्वी थे और अत्यन्त घोर तपस्यामें लगे हुए थे। वे प्रतेदिन सायंकाल और प्रातःकाल स्नान एवं संध्योपासना करके विधिपूर्वक अग्निहोत्र करते और वेदोंके स्वाध्यायमें तत्पर रहते थे। ब्रह्मर्षि जाजलि वानप्रस्थके धर्मकी विधिको जानने और पालनेवाले थे, वे अपने तेजसे प्रज्वलित हो रहे थे
agnīn paricaran samyak svādhyāya-paramo dvijaḥ | vānaprastha-vidhāna-jño jājali-jvalitaḥ śriyā ||
భీష్ముడు పలికెను—ఆ ద్విజముని విధిపూర్వకంగా అగ్నులను పరిచర్య చేసి, వేదస్వాధ్యాయంలో పరమంగా నిమగ్నుడై ఉండెను. వానప్రస్థవిధానాన్ని తెలిసిన జాజలి తేజస్సుతో శ్రీమంతంగా ప్రకాశించెను.
भीष्म उवाच