महाभूत–इन्द्रिय–मनस्–बुद्धि–अन्तरात्मा विवेकः | Discrimination of Elements, Senses, Mind, Intellect, and Inner Self
नियतो नियताहार: षष्ठ भुक्तो5प्रमत्तवान् | तदग्निहोत्रं ता गावो यज्ञाज़नि च सर्वश:,वानप्रस्थी पुरुष नियमके साथ रहे, नियमानुकूल भोजन करे। दिनके छठे भाग अर्थात् तीसरे पहरमें एक बार अन्न ग्रहण करे और प्रमादसे बचा रहे। गृहस्थाश्रमकी ही भाँति अन्निहोत्र, वैसी ही गो-सेवा तथा उसी प्रकार यज्ञके सम्पूर्ण अंगोंका सम्पादन करना वानप्रस्थका धर्म है
niyato niyatāhāraḥ ṣaṣṭha-bhukto ’pramattavān | tad agnihotraṃ tā gāvo yajñāṅgāni ca sarvaśaḥ |
వ్యాసుడు పలికెను—వానప్రస్థుడు నియమబద్ధుడై, నియమానుగుణమైన ఆహారమే తీసుకొనవలెను. దినములో ఆరవ భాగమున, అనగా నియతకాలమున, ఒక్కసారి భోజనము చేసి, అప్రమత్తుడై ఉండవలెను. గృహస్థునివలె అగ్నిహోత్రము, గోవుల సేవ, మరియు యజ్ఞమునకు సంబంధించిన సమస్త అంగములను యథావిధిగా నిర్వహించుట—ఇదే వానప్రస్థ ధర్మము.
व्यास उवाच