अव्यक्त-मानस-सृष्टिवादः
Doctrine of Creation from the Unmanifest ‘Mānasa’
यस्मिन् यस्मिंस्तु विषये यो यो याति विनिश्चयम् | स तमेवाभिजानाति नान््यं भरतसत्तम,भरतश्रेष्ठ! जो-जो पुरुष जिस-जिस विषयमें पूर्ण निश्चयको पहुँच जाता है (जिसके द्वारा उसे अभीष्ट सिद्धिका विश्वास हो जाता है), उसीको वह कर्तव्य समझता है। दूसरे विषयको नहीं
ఓ భరతశ్రేష్ఠా! ఎవడు ఏ విషయంలో దృఢ నిశ్చయానికి చేరుతాడో, అతడు అదే తన కర్తవ్యమని భావిస్తాడు; ఇతరాన్ని కాదు.
भीष्म उवाच