आपद्धर्मे राज्ञः नीतिः — Bharadvāja’s Counsel on Crisis-Statecraft (Śānti Parva 138)
दीर्घसूत्रस्तु यस्तत्र सो5ब्रवीत् सम्यगुच्यते । न तु कार्या त्वरा तावदिति मे निश्चिता मति:,इसपर वहाँ जो दीर्घसूत्री था, उसने कहा--'मित्र! तुम बात तो ठीक कहते हो; परंतु मेरा यह दृढ़ विचार है कि अभी हमें जल्दी नहीं करनी चाहिये”
dīrghasūtrastu yastatra so 'bravīt samyag ucyate | na tu kāryā tvarā tāvad iti me niścitā matiḥ ||
అక్కడ ఆలస్యప్రవృత్తి గలవాడు ఇలా అన్నాడు—“మిత్రమా! నీవు చెప్పింది సరిగ్గానే ఉంది; కానీ ఇప్పుడే తొందరపడకూడదనేది నా దృఢ నిశ్చయం.”
भीष्म उवाच