त्रिवर्गमूलनिश्चयः — Determining the Roots of Dharma, Artha, and Kāma
Mahābhārata, Śānti-parva 123
अत्र त्वमनुकम्पां वै कर्तुमहसि शंकर । संकरो न भवेदत्र यथा तद् वै विधीयताम्,ऐसी अवस्था हो जानेपर पितामह ब्रह्माने सनातन भगवान् विष्णुका पूजन करके वरदायक देवता महादेवजीसे कहा--“शंकर! इस परिस्थितिमें आपको कृपा करनी चाहिये। जिस प्रकार संसारमें वर्णसंकरता न फैले, वह उपाय आप करें
atra tvam anukampāṁ vai kartum arhasi śaṅkara | saṅkaro na bhaved atra yathā tad vai vidhīyatām ||
“శంకరా! ఇక్కడ మీరు తప్పక కరుణ చూపాలి. ఈ లోకంలో వర్ణసంకరత కలగకుండా ఉండేలా వ్యవస్థ చేయండి.”
वसुहरोम उवाच