Durgātitaraṇa—Conduct for Crossing Difficulties (दुर्गातितरणम्)
जिनके शुभ कर्म दिखावेके लिये नहीं होते, जो सदा मीठे वचन बोलते और जिनका धन सत्कर्मोके लिये बँधा हुआ है, वे दुर्गण संकटोंसे पार हो जाते हैं ।। अनध्यायेषु ये विप्रा: स्वाध्यायं नेह कुर्वते । तपोनिष्ठा: सुतपसो दुर्गाण्यतितरन्ति ते,जो अनध्यायके अवसरोंपर वेदोंका स्वाध्याय नहीं करते और तपस्यामें ही लगे रहते हैं, वे उत्तम तपस्वी ब्राह्मण दुस्तर विपत्तिसे छुटकारा पा जाते हैं
bhīṣma uvāca | anadhyāyeṣu ye viprāḥ svādhyāyaṃ neha kurvate | taponiṣṭhāḥ sutapaso durgāṇy atitaranti te ||
భీష్ముడు పలికెను—అనధ్యాయ దినాలలో ఇక్కడ వేదస్వాధ్యాయం చేయక, తపస్సులోనే స్థిరంగా నిలిచే బ్రాహ్మణులు—ఆ సిద్ధ తపస్వులు దుర్గమమైన విపత్తులను దాటి పోతారు.
भीष्म उवाच