गान्धारी-प्रशमनम् — Pacification of Gāndhārī and Kṛṣṇa’s Counsel at Hāstinapura
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ श्लोक मिलाकर कुल ८६ श्लोक हैं।) पम्प बछ। अ-काज जा द्विषष्टितमो<5 ध्याय: पाण्डवोंका कौरव शिबिरमें पहुँचना, अर्जुनके रथका दग्ध होना और पाण्डवोंका है श्रीकृष्णको हस्तिनापुर जना संजय उवाच ततस्ते प्रययु: सर्वे निवासाय महीक्षित: । शड्खान् प्रध्मापयन्तो वै हृष्टा: परिघबाहव:
sañjaya uvāca | tataste prayayuḥ sarve nivāsāya mahīkṣitaḥ | śaṅkhān pradhmāpayanto vai hṛṣṭāḥ parighabāhavaḥ ||
సంజయుడు అన్నాడు—ఆ తరువాత ఆ రాజులందరూ నివాసం (విశ్రాంతి) కోసం బయలుదేరారు. వారు హర్షంతో శంఖాలను ఊదుతూ ముందుకు సాగారు; వారి భుజాలు పరిఘంలా బలంగా ఉన్నాయి.
संजय उवाच