Gadā-yuddhe Bhīma–Duryodhanayoḥ Tumulaḥ Saṃprahāraḥ
Mace-duel’s intense exchange
नैष शक्तो रणे जेतुं मन्दात्मा मां सुयोधन: । अद्य क्रोध॑ विमोक्ष्यामि निगूढं हृदये चिरम्,'भैया! यह मन्दबुद्धि दुर्योधन रणभूमिमें मुझे किसी प्रकार परास्त नहीं कर सकता। आज मैं अपने हृदयमें चिरकालसे छिपाये हुए क्रोधको कौरवराज दुर्योधनपर उसी प्रकार छोड़ूँगा, जैसे अर्जुनने खाण्डववनमें अग्निको छोड़ा था। पाण्डुनन्दन! आज आपके हृदयका काँटा मैं निकाल दूँगा
sañjaya uvāca | naiṣa śakto raṇe jetuṃ mandātmā māṃ suyodhanaḥ | adya krodhaṃ vimokṣyāmi nigūḍhaṃ hṛdaye ciram ||
అన్నా! ఈ మందబుద్ధి సుయోధనుడు యుద్ధరంగంలో నన్ను జయించలేడు. నాలో దీర్ఘకాలంగా హృదయంలో దాచుకున్న కోపాన్ని ఈ రోజు విడిచిపెడతాను.
संजय उवाच