यथा तुदसि मर्माणि वाक्शरैरिह नो भृशम् | तथा स्मारयिता ते<हं कृन्तन् मर्माणि संयुगे,जैसे यहाँ तू अपने वचनरूपी बाणोंसे हमारे मर्मस्थानोंमें अत्यन्त पीड़ा पहुँचा रहा है, उसी प्रकार जब युद्धमें मैं तेरा हृदय विदीर्ण करने लगूँगा, उस समय तेरी कही हुई इन बातोंकी याद दिलाऊँगा
yathā tudasī marmāṇi vākśarair iha no bhṛśam | tathā smārayitā te 'haṃ kṛntan marmāṇi saṃyuge ||
“ఇక్కడ నీవు మాటలనే బాణాలుగా చేసి మా మర్మస్థానాలను తీవ్రంగా గుచ్చుతున్నట్లే, యుద్ధంలో నేను నీ మర్మస్థానాలను చీల్చడం మొదలుపెట్టినప్పుడు, నీ ఈ మాటలనే నీకు గుర్తు చేస్తాను.”
भीमसेन उवाच