Chapter 15: Counsel on Initiative vs. Renunciation in the Rajasuya Project (सभापर्व, अध्याय १५)
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५६ श्लोक मिलाकर कुल ७५३ श्लोक हैं) नशा (0) आस अत+- पञ्चदशो<् ध्याय: जरासंधके विषयमें राजा युधिष्ठिर, भीम और श्रीकृष्णकी बातचीत युधिछ्िर उवाच उक्त त्वया बुद्धिमता यन्नान्यो वक्तुमहति । संशयानां हि निर्मोक्ता त्वन्नान्यो विद्यते भुवि,युधिष्ठिर बोले--श्रीकृष्ण! आप परम बुद्धिमान् हैं, आपने जैसी बात कही है, वैसी दूसरा कोई नहीं कह सकता। इस पृथ्वीपर आपके सिवा समस्त संशयोंको मिटानेवाला और कोई नहीं है
Yudhiṣṭhira uvāca | uktaṃ tvayā buddhimatā yan nānyo vaktum arhati | saṃśayānāṃ hi nirmoktā tvannānyo vidyate bhuvi ||
యుధిష్ఠిరుడు పలికెను—హే కృష్ణా, నీవు పరమ జ్ఞానవంతుడవు. నీవు పలికిన మాటలను మరెవ్వరూ పలుకుటకు యోగ్యులు కారు. ఈ భూమిపై నిన్ను తప్ప మా సందేహాలను నిజంగా నివృత్తి చేయగలవాడు మరొకడు లేడు.
युधिछ्िर उवाच